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*अनुसूचित जाति के अधिकारों की आवाज़ को दबाने का प्रयास विफल**

*अनुसूचित जाति के अधिकारों की आवाज़ को दबाने का प्रयास विफल**

**अनुसूचित जाति के अधिकारों की आवाज़ को दबाने का प्रयास विफल**

**ESO INDIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह व प्रदेश अध्यक्ष पवन सिंह देवक ने धमकी भरे नोटिस का दिया कानूनी जवाब**

**संविधान के तहत की गई शिकायत को डराने की कोशिश नाकाम**

 

 

**प्रवीण सिंह व पवन सिंह देवक बोले—न्याय से कोई समझौता नहीं**

**नाबालिग बच्ची के पक्ष में खड़े संगठन पर दबाव बनाने की साज़िश बेनकाब**

 

**ESO INDIA नेतृत्व ने कानूनी जवाब से उजागर किया सच**

 

समाचार (प्रकाशन हेतु)

 

जबलपुर।

अनुसूचित जाति की नाबालिग बालिका के साथ दुराचार के प्रयास से जुड़े एक अत्यंत गंभीर प्रकरण में न्याय की आवाज़ उठाने पर अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र संगठन (ESO INDIA) के शीर्ष नेतृत्व को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।

हालाँकि संगठन ने इस दबाव के आगे झुकने के बजाय कानूनी एवं संवैधानिक मार्ग अपनाते हुए सशक्त जवाब दिया है।

 

ESO INDIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह एवं पवन सिंह देवक (प्रदेश अध्यक्ष, विधि छात्र संगठन) को एक पुलिस अधिकारी के परिजन की ओर से धमकी भरा लीगल नोटिस भेजा गया था, जिसमें सार्वजनिक हित में की गई शिकायत को झूठा और मानहानिकारक बताने का प्रयास किया गया।

 

संगठन की ओर से इस नोटिस का विधिसम्मत, तथ्यात्मक और मजबूत कानूनी उत्तर भेजा गया है। जवाब में स्पष्ट किया गया है कि संगठन द्वारा की गई शिकायत:

 

एक 14 वर्षीय अनुसूचित जाति की नाबालिग बालिका के साथ हुए दुराचार के प्रयास से संबंधित है

 

POCSO अधिनियम एवं SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत आने वाला विषय है

 

केवल सक्षम संवैधानिक व शासकीय संस्थाओं को निष्पक्ष जांच की मांग हेतु भेजी गई थी

 

संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं न्याय की मांग के अधिकार के अंतर्गत आती है

 

धमकी नहीं, न्याय की लड़ाई

 

ESO INDIA के नेतृत्व ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस प्रकार के लीगल नोटिस का उद्देश्य न्याय की आवाज़ को दबाना और आरोपी को संरक्षण देना प्रतीत होता है, जो कानून व संविधान दोनों की भावना के विरुद्ध है।

 

अवैध प्रचार से हुई मानहानि

 

संगठन ने यह भी बताया कि उक्त नोटिस को विधिवत प्राप्त होने से पहले ही सोशल मीडिया व समाचार माध्यमों में अवैध रूप से प्रसारित किया गया, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के नेतृत्व को मानसिक, सामाजिक एवं प्रतिष्ठात्मक क्षति पहुँची।

 

कानून के दायरे में संघर्ष जारी

 

प्रवीण सिंह एवं पवन सिंह देवक ने संयुक्त रूप से कहा कि:

 

“नाबालिग बच्ची और अनुसूचित समाज के अधिकारों की रक्षा करना हमारा संवैधानिक दायित्व है।

किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव हमें सत्य और न्याय से पीछे नहीं हटा सकता।”

 

संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार का दबाव, धमकी या झूठी कानूनी कार्यवाही की जाती है, तो वह देश के सभी वैधानिक, संवैधानिक और न्यायिक मंचों पर मजबूती से जवाब देगा।

 

जनता से अपील

 

ESO INDIA ने देश की जनता से अपील की है कि वे न्याय, संविधान और पीड़ितों के अधिकारों के साथ मजबूती से खड़े रहें, क्योंकि लोकतंत्र की असली शक्ति सच के साथ खड़े लोगों में निहित होती है।

 

भवदीय

 

लोकेन्द्र सिंह

कार्यालय मंत्री एवं मीडिया प्रभारी

अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र संगठन (ESO INDIA)

 

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